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मंगलनाथ धाम उज्जैन • शास्त्रोक्त वैदिक पूजन

नवग्रह शांति पूजा, उज्जैन

वैदिक विधि से नौ ग्रहों की शांति एवं समस्त ग्रह दोष निवारण हेतु विशेष अनुष्ठान

पंडित हरिओम शर्मा द्वारा मंगलनाथ धाम उज्जैन में शास्त्रोक्त विधि से सम्पन्न कराई जाने वाली नवग्रह शांति पूजा सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु — इन नौ ग्रहों के अशुभ प्रभाव को शांत कर जीवन में सुख-समृद्धि व संतुलन लाने हेतु की जाती है।

12+
वर्षों का अनुभव
8500+
अनुष्ठान सम्पन्न
नवग्रह
शांति विशेषज्ञ
Understanding Navgraha Dosh

नवग्रह शांति पूजा क्या है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुंडली में नौ ग्रहों की स्थिति व्यक्ति के संपूर्ण जीवन — स्वास्थ्य, धन, करियर, विवाह व मानसिक शांति — को प्रभावित करती है।

नवग्रह शांति पूजा एक व्यापक वैदिक अनुष्ठान है जिसमें कुंडली के नौ ग्रहों — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु व केतु — की एक साथ शांति की जाती है। ज्योतिष शास्त्र में इन नौ ग्रहों को जीवन की हर घटना का कारक माना गया है।

नवग्रह दोष मुख्य रूप से तब प्रभावी होता है जब कुंडली में निम्न स्थितियां बनती हैं:

शनि की साढ़े साती/ढैय्याजीवन में संघर्ष, विलंब व मानसिक तनाव की प्रमुख वजह मानी जाती है।
राहु-केतु महादशाअचानक उतार-चढ़ाव, भ्रम व अनिश्चितता उत्पन्न करने वाली ग्रह दशा।
सूर्य-चंद्र की पीड़ित स्थितिआत्मविश्वास, मन व स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
मंगल दोषविवाह में देरी एवं दाम्पत्य जीवन में तनाव का कारण बनता है।
गुरु-शुक्र का निर्बल होनाधन, ज्ञान, वैवाहिक सुख व समृद्धि में कमी ला सकता है।
बुध की प्रतिकूल स्थितिनिर्णय क्षमता, व्यापार व संचार में बाधा उत्पन्न करता है।

नवग्रह शांति पूजा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह किसी एक ग्रह तक सीमित न होकर समस्त नौ ग्रहों को संतुलित करती है — जिससे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में एक साथ सकारात्मक परिवर्तन का अनुभव होता है। यह पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी मानी जाती है जिनकी कुंडली में एक से अधिक ग्रह दोष पाए जाते हैं।

Self Check

क्या आपकी कुंडली में नवग्रह दोष हो सकता है?

यदि आपके जीवन में निम्न में से कई संकेत बार-बार दिखाई दे रहे हैं, तो कुंडली की जांच अवश्य कराएं।

01

लगातार असफलता

मेहनत के बावजूद करियर व व्यापार में अपेक्षित परिणाम न मिलना।

02

बार-बार धन हानि

अचानक आर्थिक नुकसान अथवा धन रुकने जैसी स्थितियां बार-बार बनना।

03

स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां

बिना ठोस कारण बार-बार बीमार पड़ना अथवा थकान महसूस होना।

04

मानसिक अशांति

बेचैनी, नींद न आना और निर्णय लेने में निरंतर कठिनाई।

05

शनि साढ़े साती का प्रभाव

शनि की साढ़े साती अथवा ढैय्या के दौरान कठिनाइयों का अनुभव होना।

06

विवाह व रिश्तों में बाधा

विवाह में देरी अथवा रिश्तों में बार-बार अस्थिरता आना।

07

राहु-केतु की अशुभ दशा

अचानक भ्रम, गलत निर्णय अथवा अनपेक्षित घटनाओं का सामना करना।

08

बार-बार बाधाएं

हर महत्वपूर्ण कार्य में अंतिम समय पर अड़चन आना।

The Nine Planets

नवग्रह — नौ ग्रह एवं उनका प्रभाव

प्रत्येक ग्रह जीवन के अलग क्षेत्र का कारक है। नवग्रह शांति पूजा में इन सभी नौ ग्रहों की एक साथ शांति की जाती है।

सू

सूर्य देव

Surya · Sun

आत्मा, आत्मविश्वास, पिता व सरकारी क्षेत्र के कारक। पीड़ित सूर्य मान-सम्मान व स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

चं

चंद्र देव

Chandra · Moon

मन, भावनाएं व माता के कारक। अशुभ चंद्र मानसिक अस्थिरता व चिंता उत्पन्न करता है।

मं

मंगल देव

Mangal · Mars

साहस, ऊर्जा व भाई-बहन के कारक। मांगलिक दोष विवाह व दाम्पत्य जीवन को प्रभावित करता है।

बु

बुध देव

Budh · Mercury

बुद्धि, व्यापार व संचार के कारक। अशुभ बुध निर्णय क्षमता व व्यापार को प्रभावित करता है।

गु

गुरु देव

Guru · Jupiter

ज्ञान, धन व विवाह के कारक। निर्बल गुरु समृद्धि व वैवाहिक सुख में कमी ला सकता है।

शु

शुक्र देव

Shukra · Venus

प्रेम, सौंदर्य व वैभव के कारक। पीड़ित शुक्र दाम्पत्य सुख व ऐश्वर्य को प्रभावित करता है।

शनि देव

Shani · Saturn

कर्म, न्याय व अनुशासन के कारक। साढ़े साती व ढैय्या जीवन में संघर्ष ला सकती है।

रा

राहु देव

Rahu

भ्रम, महत्वाकांक्षा व अप्रत्याशित घटनाओं के कारक। अशुभ राहु जीवन में अनिश्चितता बढ़ाता है।

के

केतु देव

Ketu

वैराग्य, मोक्ष व आध्यात्म के कारक। पीड़ित केतु मानसिक अशांति व भ्रम उत्पन्न करता है।

Sacred Significance

नवग्रह शांति पूजा के लिए मंगलनाथ धाम उज्जैन क्यों विशेष माना जाता है?

1

सप्त पुरियों में से एक पवित्र नगरी

उज्जैन को ज्योतिष व वैदिक अनुष्ठानों की प्राचीन नगरी माना जाता है — यहां की भूमि की ऊर्जा ग्रह शांति अनुष्ठानों को विशेष रूप से प्रभावी बनाती है।

2

मंगल ग्रह की उत्पत्ति भूमि

स्कंद पुराण की मान्यता अनुसार मंगल ग्रह उज्जैन की भूमि से उत्पन्न हुए — इस कारण नवग्रह से जुड़े अनुष्ठानों के लिए यह स्थान अत्यंत शुभ माना जाता है।

3

ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि

भारत के प्रतिष्ठित ज्योतिषी आज भी ग्रह दोष से ग्रस्त व्यक्तियों को उज्जैन में पूजा कराने की पहली प्राथमिकता बताते हैं।

4

शास्त्रोक्त विधि व अनुभव

पंडित हरिओम शर्मा द्वारा शास्त्रोक्त विधि से सम्पन्न नवग्रह पूजा में वैदिक मंत्रोच्चार, हवन व संकल्प सम्मिलित होते हैं।

क्यों आते हैं श्रद्धालु उज्जैन?

पंडित हरिओम शर्मा 12+ वर्षों से मंगलनाथ धाम उज्जैन में शास्त्रोक्त विधि से नवग्रह शांति पूजा सम्पन्न करा रहे हैं। भारत के साथ-साथ विदेश से भी श्रद्धालु यहाँ विशेष रूप से इस पूजा हेतु आते हैं।

नवग्रह शांति विशेषज्ञ
What You May Experience

नवग्रह शांति पूजा के संभावित लाभ

समग्र ग्रह संतुलन

नौ ग्रहों के संयुक्त रूप से शांत होने पर जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में संतुलन का अनुभव होता है।

करियर व व्यापार में वृद्धि

बाधाओं में कमी आने तथा अवसर बनने की संभावना बढ़ने का अनुभव श्रद्धालु बताते हैं।

आर्थिक स्थिरता

धन हानि की प्रवृत्ति में कमी एवं आर्थिक स्थिति में सुधार की संभावना।

स्वास्थ्य में सुधार

दीर्घकालिक थकान व अस्वस्थता में कमी, ऊर्जा स्तर बेहतर होने का अनुभव।

मानसिक शांति

चिंता, बेचैनी एवं निर्णय क्षमता में सुधार का अनुभव अधिकांश श्रद्धालु बताते हैं।

शनि-राहु-केतु शांति

साढ़े साती, ढैय्या व राहु-केतु दशा के दुष्प्रभाव में कमी आने की संभावना।

वैवाहिक व पारिवारिक सुख

रिश्तों में स्थिरता एवं घर के वातावरण में सकारात्मकता का अनुभव।

आध्यात्मिक उन्नति

नियमित अनुष्ठान व ग्रह शांति से जीवन के प्रति स्पष्ट व सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है।

Step by Step

पंडित हरिओम शर्मा के साथ पूजा प्रक्रिया

Step 01
1

परामर्श

Call/WhatsApp पर आपकी समस्या की प्रारंभिक चर्चा।

Step 02
2

जन्म विवरण

जन्म तिथि, समय व स्थान की जानकारी ली जाती है।

Step 03
3

ग्रह विश्लेषण

कुंडली अनुसार प्रभावित ग्रहों की पहचान की जाती है।

Step 04
4

संकल्प

यजमान के नाम व उद्देश्य सहित विधिवत संकल्प लिया जाता है।

Step 05
5

नवग्रह अनुष्ठान

नौ ग्रहों हेतु मंत्रोच्चार एवं हवन सहित सम्पूर्ण पूजन।

Step 06
6

आशीर्वाद

पूजा उपरांत व्यक्तिगत आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन।

Complete Ritual Package

पूजा में क्या-क्या सम्मिलित होता है?

संकल्प

यजमान के नाम, गोत्र व उद्देश्य सहित विधिवत संकल्प।

वैदिक मंत्रोच्चार

नौ ग्रहों के बीज मंत्रों का शास्त्रोक्त उच्चारण।

नवग्रह शांति हवन

प्रत्येक ग्रह हेतु विशेष आहुति व हवन।

विशेष पूजा सामग्री

शुद्ध एवं प्रामाणिक पूजन सामग्री का उपयोग।

नवग्रह पूजन

नौ ग्रहों की प्रतीकात्मक स्थापना सहित विधिवत पूजन।

आशीर्वाद

पंडित हरिओम शर्मा जी का व्यक्तिगत आशीर्वाद।

Home Remedies & Daily Practice

नवग्रह दोष के घरेलू उपाय एवं घर पर दैनिक पूजा विधि

शास्त्रोक्त पूजा सबसे प्रभावी एवं स्थायी समाधान मानी जाती है, परंतु इसके साथ-साथ घर पर नियमित रूप से किए जाने वाले ये सरल वैदिक उपाय भी नवग्रह दोष के प्रभाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं।

8 सरल घरेलू उपाय (Gharelu Upay)

01
नित्य सूर्य को जल अर्पण

प्रतिदिन सूर्योदय के समय तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करना सूर्य व नवग्रह शांति का सरल उपाय माना जाता है।

02
नवग्रह मंत्रों का जाप

प्रत्येक ग्रह के बीज मंत्र का नियमित जाप ग्रहों की अशुभता को धीरे-धीरे कम करने में सहायक माना जाता है।

03
शनिवार को शनि देव की पूजा

शनिवार के दिन शनि मंदिर में जाकर तेल का दीपक जलाना व काले तिल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

04
विष्णु सहस्रनाम / आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ

नियमित पाठ करने से सूर्य व समस्त ग्रहों की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

05
नवग्रह से संबंधित दान

प्रत्येक ग्रह से जुड़ी वस्तुओं — अनाज, वस्त्र, तेल इत्यादि — का यथाशक्ति दान करना शुभ माना जाता है।

06
रत्न धारण — केवल विशेषज्ञ परामर्श अनुसार

किसी भी ग्रह से संबंधित रत्न धारण से पूर्व कुंडली का विधिवत परीक्षण आवश्यक है — बिना परामर्श के रत्न धारण से बचना चाहिए।

07
पीपल वृक्ष की सेवा

शनिवार के दिन पीपल वृक्ष में जल अर्पित करना व दीपक जलाना शनि व राहु-केतु शांति में सहायक माना जाता है।

08
घर में नवग्रह यंत्र की स्थापना

विधिवत प्राण-प्रतिष्ठित नवग्रह यंत्र को घर के पूजा स्थान में स्थापित करना सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में सहायक माना जाता है।

घर पर दैनिक पूजा विधि — Step by Step

1
प्रातः स्नान एवं संकल्प

स्वच्छ होकर दिन की शुरुआत नवग्रह देवताओं के स्मरण से करें।

2
दिशा एवं आसन

पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके स्वच्छ आसन पर बैठें।

3
दीप व धूप प्रज्वलन

घी का दीपक एवं धूप-अगरबत्ती जलाकर पूजा स्थान को शुद्ध करें।

4
सूर्य को जल अर्पण

तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित करें।

5
नवग्रह मंत्र जाप

नवग्रह स्तोत्र अथवा संबंधित बीज मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें।

6
भोग अर्पण

यथाशक्ति फल अथवा मिष्ठान्न का भोग अर्पित करें।

7
आरती एवं प्रसाद वितरण

आरती करके परिवार सहित प्रसाद ग्रहण करें।

यह दैनिक विधि एक सहायक उपाय है। कुंडली में नवग्रह दोष की पुष्टि होने पर पूर्ण एवं स्थायी शांति हेतु पंडित हरिओम शर्मा द्वारा मंगलनाथ धाम, उज्जैन में शास्त्रोक्त नवग्रह शांति पूजा करवाने की सलाह दी जाती है।
About Pandit Hariom Sharma

मंगलनाथ धाम उज्जैन के अनुभवी वैदिक आचार्य एवं नवग्रह शांति विशेषज्ञ

12+ वर्षों से शास्त्रोक्त वैदिक अनुष्ठानों द्वारा हजारों श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन

पंडित हरिओम शर्मा
Mangalnath Temple Specialist · ज्योतिष दिवाकर

पंडित हरिओम शर्मा मंगलनाथ धाम, उज्जैन के प्रतिष्ठित वैदिक आचार्य हैं, जो पिछले 12+ वर्षों से नवग्रह शांति पूजा, मंगल दोष निवारण पूजा, कालसर्प दोष निवारण पूजा, महामृत्युंजय मंत्र जाप, रुद्राभिषेक एवं पितृ दोष निवारण जैसे महत्वपूर्ण वैदिक अनुष्ठान सम्पन्न करा रहे हैं।

ज्योतिष दिवाकर की उपाधि से सम्मानित, पंडित जी प्रत्येक यजमान की कुंडली का व्यक्तिगत विश्लेषण करते हैं और प्रभावित ग्रहों की पहचान कर उचित पूजा-विधि का निर्धारण करते हैं।

भारत के साथ-साथ विदेश में रहने वाले श्रद्धालु भी पंडित हरिओम शर्मा से सम्पर्क करते हैं — ऑनलाइन परामर्श एवं लाइव पूजा भागीदारी की सुविधा भी उपलब्ध है।

12+
वर्षों का अनुभव
8500+
अनुष्ठान सम्पन्न
भारत+
विदेश श्रद्धालु
क्यों चुनें पंडित हरिओम शर्मा को?
मंगलनाथ धाम विशेषज्ञ

उज्जैन के सबसे प्रामाणिक स्थान पर पूजा संपन्न कराते हैं।

ज्योतिष दिवाकर उपाधि

ज्योतिष शास्त्र में विशेष उपाधि से सम्मानित आचार्य।

व्यक्तिगत ग्रह विश्लेषण

हर यजमान की कुंडली का व्यक्तिगत विश्लेषण।

देश-विदेश में विश्वास

भारत एवं विदेश के श्रद्धालुओं का भरोसा।

Is This Puja For You?

किन लोगों को नवग्रह शांति पूजा करवानी चाहिए?

शनि साढ़े साती/ढैय्या

शनि की साढ़े साती अथवा ढैय्या से गुजर रहे श्रद्धालु।

राहु-केतु महादशा

राहु अथवा केतु की महादशा/अंतर्दशा से प्रभावित व्यक्ति।

एक से अधिक ग्रह दोष

कुंडली में एक से अधिक ग्रहों की अशुभ स्थिति हो।

करियर व व्यापार में बाधा

लगातार असफलता अथवा अनपेक्षित रुकावटों का सामना करने वाले।

स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां

दीर्घकालिक अस्वस्थता अथवा अकारण थकान महसूस करने वाले।

मानसिक अशांति

बेचैनी, चिंता अथवा निर्णय क्षमता में कमी महसूस करने वाले।

Devotee Experiences

वास्तविक श्रद्धालु अनुभव

4.9
Google Rating
★★★★★
वि
Vikram Saxena
Bhopal, MP
★★★★★

शनि की साढ़े साती से बहुत परेशान था। पंडित हरिओम शर्मा जी से नवग्रह शांति पूजा करवाई, धीरे-धीरे स्थिति में सुधार महसूस हुआ।

प्र
Priyanka Rathore
Indore, MP
★★★★★

करियर में बार-बार रुकावटें आ रही थीं। मंगलनाथ धाम उज्जैन में नवग्रह पूजा कराने के बाद नए अवसर बनने शुरू हुए।

सं
Sanjay Dubey
Jabalpur, MP
★★★★★

राहु-केतु की दशा में बहुत भ्रम की स्थिति थी। पंडित जी के मार्गदर्शन व पूजा के बाद मन में स्पष्टता आई।

नी
Neelam Agarwal
Jaipur, Rajasthan
★★★★★

ऑनलाइन परामर्श से पूरी प्रक्रिया समझाई गई। उज्जैन में पंडित जी ने नवग्रह पूजा सम्पन्न कराई। बहुत संतोषजनक अनुभव रहा।

रा
Rajesh Khanna
Lucknow, UP
★★★★★

स्वास्थ्य व धन दोनों में परेशानी थी। नवग्रह शांति पूजा के बाद धीरे-धीरे जीवन में स्थिरता आई। धन्यवाद पंडित जी।

मी
Meena Choudhary
Raipur, Chhattisgarh
★★★★★

मंगलनाथ धाम उज्जैन जाकर अनुष्ठान कराया। पूरी विधि शास्त्रोक्त और विश्वसनीय लगी।

Frequently Asked Questions

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवग्रह शांति पूजा उज्जैन की लागत कितनी होती है?

+

पूजा की लागत विधि, सामग्री और अनुष्ठान के प्रकार पर निर्भर करती है। सटीक जानकारी हेतु पंडित हरिओम शर्मा जी से सीधे संपर्क करें: +91 77479 10945।

नवग्रह शांति पूजा में कितना समय लगता है?

+

सामान्यतः पूजा 3-4 घंटे में सम्पन्न होती है, क्योंकि इसमें नौ ग्रहों हेतु संकल्प, मंत्रोच्चार व हवन सम्मिलित है।

नवग्रह पूजा के लिए सबसे शुभ दिन कौन सा है?

+

रविवार का दिन नवग्रह पूजा हेतु विशेष शुभ माना जाता है, परंतु पंडित जी आपकी कुंडली अनुसार सटीक मुहूर्त बताते हैं।

क्या ऑनलाइन पूजा की व्यवस्था की जा सकती है?

+

हाँ, जो श्रद्धालु उज्जैन नहीं आ सकते उनके लिए वीडियो कॉल पर लाइव पूजा भागीदारी की सुविधा उपलब्ध है।

मंगलनाथ धाम उज्जैन को ही क्यों चुनें?

+

मान्यता अनुसार मंगल ग्रह का उत्पत्ति स्थान उज्जैन है तथा यह सप्त पुरियों में से एक है, इसलिए यहाँ की ग्रह शांति पूजा का प्रभाव सबसे विशेष माना जाता है।

नवग्रह शांति पूजा और मंगल दोष पूजा में क्या अंतर है?

+

मंगल दोष पूजा केवल मंगल ग्रह की शांति हेतु होती है, जबकि नवग्रह शांति पूजा में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु व केतु — इन सभी नौ ग्रहों की एक साथ शांति की जाती है।

क्या शनि साढ़े साती में यह पूजा लाभकारी है?

+

हाँ, शनि साढ़े साती अथवा ढैय्या के दौरान नवग्रह शांति पूजा विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है क्योंकि इसमें शनि सहित समस्त ग्रहों की शांति की जाती है।

पंडित हरिओम शर्मा जी से अपॉइंटमेंट कैसे लें?

+

Call या WhatsApp के माध्यम से +91 77479 10945 पर सम्पर्क करें। आपकी जन्म-तिथि और समस्या अनुसार अपॉइंटमेंट तय किया जाएगा।

क्या पूजा के लिए कुंडली अनिवार्य है?

+

सही दिशा में पूजा हेतु जन्म तिथि, समय और स्थान की जानकारी उपयोगी होती है, परंतु इसके बिना भी सामान्य नवग्रह पूजा सम्पन्न की जा सकती है।

यह पूजा किन लोगों के लिए आवश्यक है?

+

जिन्हें करियर बाधा, धन हानि, स्वास्थ्य समस्या, शनि साढ़े साती, राहु-केतु दशा अथवा एक से अधिक ग्रह दोष हैं, उनके लिए यह पूजा विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है।

क्या परिवार के सदस्य पूजा में उपस्थित हो सकते हैं?

+

हाँ, परिवार के सदस्य पूजा में सम्मिलित हो सकते हैं। यह शुभ भी माना जाता है।

क्या एक ही दिन में पूजा संभव है?

+

हाँ, मुहूर्त उपलब्धता के अनुसार Same Day Puja की व्यवस्था की जा सकती है। पहले से Call या WhatsApp कर अवश्य जानकारी लें।

क्या पूजा का प्रमाण पत्र मिलता है?

+

हाँ, पूजा सम्पन्न होने के बाद विधिवत प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है।

पूजा के अलावा और क्या उपाय सुझाए जाते हैं?

+

पूजा के साथ रत्न धारण, दान-विधान, उपवास व मंत्र जाप जैसे अतिरिक्त उपाय भी कुंडली अनुसार सुझाए जाते हैं।

क्या यह पूजा विदेश में रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी उपलब्ध है?

+

हाँ, विदेश में रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन परामर्श और वीडियो कॉल पर लाइव पूजा भागीदारी की सुविधा उपलब्ध है।

नवग्रह शांति पूजा का प्रभाव कितने समय तक रहता है और क्या इसे दोबारा करवाना पड़ता है?

+

शास्त्रों के अनुसार विधिवत सम्पन्न की गई नवग्रह शांति पूजा का प्रभाव दीर्घकालिक माना जाता है, विशेषकर जब यह मंगलनाथ धाम जैसे शक्तिशाली स्थान पर शुद्ध संकल्प और सही मुहूर्त में की जाए। अधिकांश मामलों में एक बार की पूजा पर्याप्त होती है, परंतु यदि कुंडली में शनि साढ़े साती, राहु-केतु महादशा अथवा कोई विशेष ग्रह दशा सक्रिय हो तो पंडित हरिओम शर्मा यजमान को दशा अवधि के अनुसार वार्षिक अनुवर्ती (follow-up) पूजा अथवा नियमित मंत्र जाप जैसे सहायक उपाय अपनाने की सलाह भी देते हैं। पंडित जी प्रत्येक यजमान की कुंडली का व्यक्तिगत विश्लेषण करने के बाद ही यह तय करते हैं कि पूजा कितनी बार और किस अंतराल में करवाई जानी चाहिए, ताकि शाश्वत व स्थायी परिणाम प्राप्त हो सकें।

क्या आप भी ग्रह दोष, शनि साढ़े साती या राहु-केतु बाधा से परेशान हैं?

पंडित हरिओम शर्मा से सीधे संपर्क करें और अपनी समस्या के अनुसार उचित वैदिक मार्गदर्शन प्राप्त करें।

मंगलनाथ मंदिर, उज्जैन, मध्य प्रदेश
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