वैदिक विधि से नौ ग्रहों की शांति एवं समस्त ग्रह दोष निवारण हेतु विशेष अनुष्ठान
पंडित हरिओम शर्मा द्वारा मंगलनाथ धाम उज्जैन में शास्त्रोक्त विधि से सम्पन्न कराई जाने वाली नवग्रह शांति पूजा सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु — इन नौ ग्रहों के अशुभ प्रभाव को शांत कर जीवन में सुख-समृद्धि व संतुलन लाने हेतु की जाती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुंडली में नौ ग्रहों की स्थिति व्यक्ति के संपूर्ण जीवन — स्वास्थ्य, धन, करियर, विवाह व मानसिक शांति — को प्रभावित करती है।
नवग्रह शांति पूजा एक व्यापक वैदिक अनुष्ठान है जिसमें कुंडली के नौ ग्रहों — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु व केतु — की एक साथ शांति की जाती है। ज्योतिष शास्त्र में इन नौ ग्रहों को जीवन की हर घटना का कारक माना गया है।
नवग्रह दोष मुख्य रूप से तब प्रभावी होता है जब कुंडली में निम्न स्थितियां बनती हैं:
नवग्रह शांति पूजा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह किसी एक ग्रह तक सीमित न होकर समस्त नौ ग्रहों को संतुलित करती है — जिससे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में एक साथ सकारात्मक परिवर्तन का अनुभव होता है। यह पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी मानी जाती है जिनकी कुंडली में एक से अधिक ग्रह दोष पाए जाते हैं।
यदि आपके जीवन में निम्न में से कई संकेत बार-बार दिखाई दे रहे हैं, तो कुंडली की जांच अवश्य कराएं।
मेहनत के बावजूद करियर व व्यापार में अपेक्षित परिणाम न मिलना।
अचानक आर्थिक नुकसान अथवा धन रुकने जैसी स्थितियां बार-बार बनना।
बिना ठोस कारण बार-बार बीमार पड़ना अथवा थकान महसूस होना।
बेचैनी, नींद न आना और निर्णय लेने में निरंतर कठिनाई।
शनि की साढ़े साती अथवा ढैय्या के दौरान कठिनाइयों का अनुभव होना।
विवाह में देरी अथवा रिश्तों में बार-बार अस्थिरता आना।
अचानक भ्रम, गलत निर्णय अथवा अनपेक्षित घटनाओं का सामना करना।
हर महत्वपूर्ण कार्य में अंतिम समय पर अड़चन आना।
प्रत्येक ग्रह जीवन के अलग क्षेत्र का कारक है। नवग्रह शांति पूजा में इन सभी नौ ग्रहों की एक साथ शांति की जाती है।
आत्मा, आत्मविश्वास, पिता व सरकारी क्षेत्र के कारक। पीड़ित सूर्य मान-सम्मान व स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
मन, भावनाएं व माता के कारक। अशुभ चंद्र मानसिक अस्थिरता व चिंता उत्पन्न करता है।
साहस, ऊर्जा व भाई-बहन के कारक। मांगलिक दोष विवाह व दाम्पत्य जीवन को प्रभावित करता है।
बुद्धि, व्यापार व संचार के कारक। अशुभ बुध निर्णय क्षमता व व्यापार को प्रभावित करता है।
ज्ञान, धन व विवाह के कारक। निर्बल गुरु समृद्धि व वैवाहिक सुख में कमी ला सकता है।
प्रेम, सौंदर्य व वैभव के कारक। पीड़ित शुक्र दाम्पत्य सुख व ऐश्वर्य को प्रभावित करता है।
कर्म, न्याय व अनुशासन के कारक। साढ़े साती व ढैय्या जीवन में संघर्ष ला सकती है।
भ्रम, महत्वाकांक्षा व अप्रत्याशित घटनाओं के कारक। अशुभ राहु जीवन में अनिश्चितता बढ़ाता है।
वैराग्य, मोक्ष व आध्यात्म के कारक। पीड़ित केतु मानसिक अशांति व भ्रम उत्पन्न करता है।
उज्जैन को ज्योतिष व वैदिक अनुष्ठानों की प्राचीन नगरी माना जाता है — यहां की भूमि की ऊर्जा ग्रह शांति अनुष्ठानों को विशेष रूप से प्रभावी बनाती है।
स्कंद पुराण की मान्यता अनुसार मंगल ग्रह उज्जैन की भूमि से उत्पन्न हुए — इस कारण नवग्रह से जुड़े अनुष्ठानों के लिए यह स्थान अत्यंत शुभ माना जाता है।
भारत के प्रतिष्ठित ज्योतिषी आज भी ग्रह दोष से ग्रस्त व्यक्तियों को उज्जैन में पूजा कराने की पहली प्राथमिकता बताते हैं।
पंडित हरिओम शर्मा द्वारा शास्त्रोक्त विधि से सम्पन्न नवग्रह पूजा में वैदिक मंत्रोच्चार, हवन व संकल्प सम्मिलित होते हैं।
पंडित हरिओम शर्मा 12+ वर्षों से मंगलनाथ धाम उज्जैन में शास्त्रोक्त विधि से नवग्रह शांति पूजा सम्पन्न करा रहे हैं। भारत के साथ-साथ विदेश से भी श्रद्धालु यहाँ विशेष रूप से इस पूजा हेतु आते हैं।
नवग्रह शांति विशेषज्ञनौ ग्रहों के संयुक्त रूप से शांत होने पर जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में संतुलन का अनुभव होता है।
बाधाओं में कमी आने तथा अवसर बनने की संभावना बढ़ने का अनुभव श्रद्धालु बताते हैं।
धन हानि की प्रवृत्ति में कमी एवं आर्थिक स्थिति में सुधार की संभावना।
दीर्घकालिक थकान व अस्वस्थता में कमी, ऊर्जा स्तर बेहतर होने का अनुभव।
चिंता, बेचैनी एवं निर्णय क्षमता में सुधार का अनुभव अधिकांश श्रद्धालु बताते हैं।
साढ़े साती, ढैय्या व राहु-केतु दशा के दुष्प्रभाव में कमी आने की संभावना।
रिश्तों में स्थिरता एवं घर के वातावरण में सकारात्मकता का अनुभव।
नियमित अनुष्ठान व ग्रह शांति से जीवन के प्रति स्पष्ट व सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है।
Call/WhatsApp पर आपकी समस्या की प्रारंभिक चर्चा।
जन्म तिथि, समय व स्थान की जानकारी ली जाती है।
कुंडली अनुसार प्रभावित ग्रहों की पहचान की जाती है।
यजमान के नाम व उद्देश्य सहित विधिवत संकल्प लिया जाता है।
नौ ग्रहों हेतु मंत्रोच्चार एवं हवन सहित सम्पूर्ण पूजन।
पूजा उपरांत व्यक्तिगत आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन।
यजमान के नाम, गोत्र व उद्देश्य सहित विधिवत संकल्प।
नौ ग्रहों के बीज मंत्रों का शास्त्रोक्त उच्चारण।
प्रत्येक ग्रह हेतु विशेष आहुति व हवन।
शुद्ध एवं प्रामाणिक पूजन सामग्री का उपयोग।
नौ ग्रहों की प्रतीकात्मक स्थापना सहित विधिवत पूजन।
पंडित हरिओम शर्मा जी का व्यक्तिगत आशीर्वाद।
शास्त्रोक्त पूजा सबसे प्रभावी एवं स्थायी समाधान मानी जाती है, परंतु इसके साथ-साथ घर पर नियमित रूप से किए जाने वाले ये सरल वैदिक उपाय भी नवग्रह दोष के प्रभाव को कम करने में सहायक माने जाते हैं।
प्रतिदिन सूर्योदय के समय तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करना सूर्य व नवग्रह शांति का सरल उपाय माना जाता है।
प्रत्येक ग्रह के बीज मंत्र का नियमित जाप ग्रहों की अशुभता को धीरे-धीरे कम करने में सहायक माना जाता है।
शनिवार के दिन शनि मंदिर में जाकर तेल का दीपक जलाना व काले तिल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
नियमित पाठ करने से सूर्य व समस्त ग्रहों की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
प्रत्येक ग्रह से जुड़ी वस्तुओं — अनाज, वस्त्र, तेल इत्यादि — का यथाशक्ति दान करना शुभ माना जाता है।
किसी भी ग्रह से संबंधित रत्न धारण से पूर्व कुंडली का विधिवत परीक्षण आवश्यक है — बिना परामर्श के रत्न धारण से बचना चाहिए।
शनिवार के दिन पीपल वृक्ष में जल अर्पित करना व दीपक जलाना शनि व राहु-केतु शांति में सहायक माना जाता है।
विधिवत प्राण-प्रतिष्ठित नवग्रह यंत्र को घर के पूजा स्थान में स्थापित करना सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
स्वच्छ होकर दिन की शुरुआत नवग्रह देवताओं के स्मरण से करें।
पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके स्वच्छ आसन पर बैठें।
घी का दीपक एवं धूप-अगरबत्ती जलाकर पूजा स्थान को शुद्ध करें।
तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित करें।
नवग्रह स्तोत्र अथवा संबंधित बीज मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
यथाशक्ति फल अथवा मिष्ठान्न का भोग अर्पित करें।
आरती करके परिवार सहित प्रसाद ग्रहण करें।
12+ वर्षों से शास्त्रोक्त वैदिक अनुष्ठानों द्वारा हजारों श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन
पंडित हरिओम शर्मा मंगलनाथ धाम, उज्जैन के प्रतिष्ठित वैदिक आचार्य हैं, जो पिछले 12+ वर्षों से नवग्रह शांति पूजा, मंगल दोष निवारण पूजा, कालसर्प दोष निवारण पूजा, महामृत्युंजय मंत्र जाप, रुद्राभिषेक एवं पितृ दोष निवारण जैसे महत्वपूर्ण वैदिक अनुष्ठान सम्पन्न करा रहे हैं।
ज्योतिष दिवाकर की उपाधि से सम्मानित, पंडित जी प्रत्येक यजमान की कुंडली का व्यक्तिगत विश्लेषण करते हैं और प्रभावित ग्रहों की पहचान कर उचित पूजा-विधि का निर्धारण करते हैं।
भारत के साथ-साथ विदेश में रहने वाले श्रद्धालु भी पंडित हरिओम शर्मा से सम्पर्क करते हैं — ऑनलाइन परामर्श एवं लाइव पूजा भागीदारी की सुविधा भी उपलब्ध है।
उज्जैन के सबसे प्रामाणिक स्थान पर पूजा संपन्न कराते हैं।
ज्योतिष शास्त्र में विशेष उपाधि से सम्मानित आचार्य।
हर यजमान की कुंडली का व्यक्तिगत विश्लेषण।
भारत एवं विदेश के श्रद्धालुओं का भरोसा।
शनि की साढ़े साती अथवा ढैय्या से गुजर रहे श्रद्धालु।
राहु अथवा केतु की महादशा/अंतर्दशा से प्रभावित व्यक्ति।
कुंडली में एक से अधिक ग्रहों की अशुभ स्थिति हो।
लगातार असफलता अथवा अनपेक्षित रुकावटों का सामना करने वाले।
दीर्घकालिक अस्वस्थता अथवा अकारण थकान महसूस करने वाले।
बेचैनी, चिंता अथवा निर्णय क्षमता में कमी महसूस करने वाले।
शनि की साढ़े साती से बहुत परेशान था। पंडित हरिओम शर्मा जी से नवग्रह शांति पूजा करवाई, धीरे-धीरे स्थिति में सुधार महसूस हुआ।
करियर में बार-बार रुकावटें आ रही थीं। मंगलनाथ धाम उज्जैन में नवग्रह पूजा कराने के बाद नए अवसर बनने शुरू हुए।
राहु-केतु की दशा में बहुत भ्रम की स्थिति थी। पंडित जी के मार्गदर्शन व पूजा के बाद मन में स्पष्टता आई।
ऑनलाइन परामर्श से पूरी प्रक्रिया समझाई गई। उज्जैन में पंडित जी ने नवग्रह पूजा सम्पन्न कराई। बहुत संतोषजनक अनुभव रहा।
स्वास्थ्य व धन दोनों में परेशानी थी। नवग्रह शांति पूजा के बाद धीरे-धीरे जीवन में स्थिरता आई। धन्यवाद पंडित जी।
मंगलनाथ धाम उज्जैन जाकर अनुष्ठान कराया। पूरी विधि शास्त्रोक्त और विश्वसनीय लगी।
शनि की साढ़े साती से बहुत परेशान था। पंडित हरिओम शर्मा जी से नवग्रह शांति पूजा करवाई, धीरे-धीरे स्थिति में सुधार महसूस हुआ।
करियर में बार-बार रुकावटें आ रही थीं। मंगलनाथ धाम उज्जैन में नवग्रह पूजा कराने के बाद नए अवसर बनने शुरू हुए।
राहु-केतु की दशा में बहुत भ्रम की स्थिति थी। पंडित जी के मार्गदर्शन व पूजा के बाद मन में स्पष्टता आई।
पूजा की लागत विधि, सामग्री और अनुष्ठान के प्रकार पर निर्भर करती है। सटीक जानकारी हेतु पंडित हरिओम शर्मा जी से सीधे संपर्क करें: +91 77479 10945।
सामान्यतः पूजा 3-4 घंटे में सम्पन्न होती है, क्योंकि इसमें नौ ग्रहों हेतु संकल्प, मंत्रोच्चार व हवन सम्मिलित है।
रविवार का दिन नवग्रह पूजा हेतु विशेष शुभ माना जाता है, परंतु पंडित जी आपकी कुंडली अनुसार सटीक मुहूर्त बताते हैं।
हाँ, जो श्रद्धालु उज्जैन नहीं आ सकते उनके लिए वीडियो कॉल पर लाइव पूजा भागीदारी की सुविधा उपलब्ध है।
मान्यता अनुसार मंगल ग्रह का उत्पत्ति स्थान उज्जैन है तथा यह सप्त पुरियों में से एक है, इसलिए यहाँ की ग्रह शांति पूजा का प्रभाव सबसे विशेष माना जाता है।
मंगल दोष पूजा केवल मंगल ग्रह की शांति हेतु होती है, जबकि नवग्रह शांति पूजा में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु व केतु — इन सभी नौ ग्रहों की एक साथ शांति की जाती है।
हाँ, शनि साढ़े साती अथवा ढैय्या के दौरान नवग्रह शांति पूजा विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है क्योंकि इसमें शनि सहित समस्त ग्रहों की शांति की जाती है।
Call या WhatsApp के माध्यम से +91 77479 10945 पर सम्पर्क करें। आपकी जन्म-तिथि और समस्या अनुसार अपॉइंटमेंट तय किया जाएगा।
सही दिशा में पूजा हेतु जन्म तिथि, समय और स्थान की जानकारी उपयोगी होती है, परंतु इसके बिना भी सामान्य नवग्रह पूजा सम्पन्न की जा सकती है।
जिन्हें करियर बाधा, धन हानि, स्वास्थ्य समस्या, शनि साढ़े साती, राहु-केतु दशा अथवा एक से अधिक ग्रह दोष हैं, उनके लिए यह पूजा विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है।
हाँ, परिवार के सदस्य पूजा में सम्मिलित हो सकते हैं। यह शुभ भी माना जाता है।
हाँ, मुहूर्त उपलब्धता के अनुसार Same Day Puja की व्यवस्था की जा सकती है। पहले से Call या WhatsApp कर अवश्य जानकारी लें।
हाँ, पूजा सम्पन्न होने के बाद विधिवत प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है।
पूजा के साथ रत्न धारण, दान-विधान, उपवास व मंत्र जाप जैसे अतिरिक्त उपाय भी कुंडली अनुसार सुझाए जाते हैं।
हाँ, विदेश में रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन परामर्श और वीडियो कॉल पर लाइव पूजा भागीदारी की सुविधा उपलब्ध है।
शास्त्रों के अनुसार विधिवत सम्पन्न की गई नवग्रह शांति पूजा का प्रभाव दीर्घकालिक माना जाता है, विशेषकर जब यह मंगलनाथ धाम जैसे शक्तिशाली स्थान पर शुद्ध संकल्प और सही मुहूर्त में की जाए। अधिकांश मामलों में एक बार की पूजा पर्याप्त होती है, परंतु यदि कुंडली में शनि साढ़े साती, राहु-केतु महादशा अथवा कोई विशेष ग्रह दशा सक्रिय हो तो पंडित हरिओम शर्मा यजमान को दशा अवधि के अनुसार वार्षिक अनुवर्ती (follow-up) पूजा अथवा नियमित मंत्र जाप जैसे सहायक उपाय अपनाने की सलाह भी देते हैं। पंडित जी प्रत्येक यजमान की कुंडली का व्यक्तिगत विश्लेषण करने के बाद ही यह तय करते हैं कि पूजा कितनी बार और किस अंतराल में करवाई जानी चाहिए, ताकि शाश्वत व स्थायी परिणाम प्राप्त हो सकें।
पंडित हरिओम शर्मा से सीधे संपर्क करें और अपनी समस्या के अनुसार उचित वैदिक मार्गदर्शन प्राप्त करें।